This festival is celebrated based on the solar year.
As per Vedic astrology, Sun transits from Saggitarius to capricorn sign on the
zodiac. Sun changes its position from
Dakshinayan (South) to Uttarayan ( North). Makar Sankranti is also known
to be the festival of Sankraman kaal of the Sun. Sun transits through 12 signs
of the Zodiac in one year. Sankranti is once in a month when sun moves from one
Zodiac sign to other. Makar Sankranti is celebrated once in year. Sun will move
into Capricorn sign of the Zodiac on the 14th of January, hence it
is called Makar Sankranti. Dakshinayan
(South) and Uttarayan (North) are both of 6 months each. Uttarayan is believed
to be the day of the Gods and Dakshinayan is believed to be the night. In
Mahabharata, Bhisham Pitama waited for the Sun’s Uttarayan while laying on his
death bed. People wake up early on this
day and bathe in rivers and lakes. People also worship the Sun and offer water
to the Sun lord. On Makar Sankranti,
Puja is done in religious places and food is offered in the form of
“Langar” to the masses. People eat
Khitchdi, Kheer and food made from “Till”. At many places, utensils made from
earth are covered in turmeric and wheat,
Turmeric, cotton, sugarcane and coins are kept in them. People also fly kites during Makar Sankranti
and tournaments are organized at many places. In eastern India Makar Sankranti,
is known as Bhogali Bihu. In southern India it is known as Pongal. In western
India it is known as Uttaayana and in Northern India It is known as Maaghi.
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गर्म पानी और स्वास्थ
हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए ऊर्जा की जरूरत
होती है जो हमें हमारे खान पान से मिलती है। हमारा पाचन तंत्र मजबूत और स्वस्थ होगा
तबी ठीक तरह से काम करेगा। अक्सर देखा जाता है कि खाने के बाद मीठे में आईसक्रीम या
कोल्डड्रिंक लेते है। जो कि हमारी पाचन की प्रकिरिया को धीमा करती है। खाना खाने से
जो अग्नि उत्पन होती है उस को ये खाद्य पदार्थ ठंडा कर देते है। हमारा पाचन तंत्र ठंडा
होने से हमारी मासपेशियां कड़ी हो जाती है और वो ठीक से काम नहीं कर पाती जिस के कारण
हमारा पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है। जिसके कारण हमें पेट की तकलीफो को झेलना पड़ता है
और अलग अलग बीमारियो का सामना करना पड़ता है। स्वस्थ रहने के लिए ठन्डे पदार्थो से हमें
परहेज करना चाहिए और गर्म पानी पीने से हमारे रक्त प्रवाह का संचार तंत्रिकाओं में
ठीक से होने लगता है। पाचन तंत्र मज़बूत होता है और हमारा शरीर स्वस्थ बनता है।
शनि का गोचर धनु राशि में
शनी धीमी गती से चलने वाला गृह है। जो कि एक राशी
में डाई साल तक स्थित रहता है। शनी को न्याय, परिश्रम, व्यपार, धन,कर्ज,आयु, दुख-पीड़ा,
धैर्य,दंड,रोग,मृत्त्यु आदि का कारक माना जाता है। गोचर का शनि बृष्चिक राशि से धनु
राशि में 26 जनवरी 2017 दिन गुरुवार को 19:30 पर केतु के नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
गोचर शनि धनु राशि में 6 अप्रैल 2017 को बक्री होगा और 21 जून 2017 को शनी धनु राशी
से बृष्चिक राशी में प्रवेश करेगा। 25 अगस्त
2017 को शनि मार्गी हो कर बृष्चिक राशि से
धनु राशी में 26 अक्टूबर 2017 को पुनः प्रवेश
करेगा। जो कि अग्नि राशी है। जिसका स्वामी बृहस्पति गृह है। इस
अवधी के दौरान शनी 3 नक्षत्रो से गुजरेगा मूल,पूर्व आषाढ और उत्तर आषाढ। पूरे वर्ष
शनी बहुत अस्थिरता देगा। गोचर का शनी हमारे जीवन में अच्छा या बुरा कैसा परिणाम देगा
जानने के लिये व्यक्तिगत जन्म कुंडली में शनी की स्थिति से, किस राशि में और किस नक्षत्र
में है और अन्य ग्रहों की स्थिति, द्रिष्टि पर और आपकी वर्तमान दशा- अंतर दशा पर निर्भर
करता है। राशि के अनुसार प्रभाव इस प्रकार होगा।
मेष :- मेष राशि में शनि दशम और एकादश भाव का स्वामी है जो कि अष्ठम भाव से नवम भाव में
प्रवेश करेगा। भाग्य उनती और लाभ प्राप्ति में रुकावटो के बावजूद शनि का पाया चाँदी
होने के कारण आय के साधन बनते रहेगे है। समस्याओ
का सामना भी करना पड़ सकता है। भाइयो और मित्रो के कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है।
वृष :- वृष राशि में शनि नवम और दशम भाव का स्वामी
है जो कि सप्तम भाव से अष्ठम भाव में प्रवेश करेगा। राशि के अनुसार अष्ठम शनि होने
से अशुभ प्रभाव रहेगा। अष्ठम शनि को शनि की ढैया भी कहते है और शनि का पाया लोहा होने
से मानसिक परेशानी रहेगी। स्वास्थ्य और आर्थिक समस्यायो की सम्भावना रहेगी।
मिथुन:- मिथुन राशि में शनि अष्ठम और नवम भाव का
स्वामी है जो की षष्टम भाव से सप्तम भाव में आने के कारण वैवाहिक जीवन में मनमुटाव
हो सकता है। सांझेदारी के कार्य में परेशानिया और पार्टनर के साथ मनमुटाव हो सकता है।
शनि का पाया तांबा होने के कारण व्यवसाय में संगर्ष के बाद सफलता भी मिलेगी।
कर्क:- कर्क राशि में शनि सप्तम और अष्ठम भाव का
स्वामी है जो की पंचम भाव से षष्टम भाव में प्रवेश करेगा राशि के अनुसार शनि का पाया
स्वर्ण होगा और गोचर शुभ फल देने वाला होगा। नोकरी और कारोबार में सफलता मिलने की सम्भावनाये
बढ़ेगी।
सिंह:- सिंह राशि में शनि षष्टम और सप्तम भाव का
स्वामी है। जो की चतुर्थ भाव से पंचम भाव में प्रवेश करेगा। राशि पर गोचर का राहु भी
होने के अनुसार पंचम शनि मानसिक परेशानी दे सकता है। औलाद से विवाद हो सकता है। अचानक
से सेहत ख़राब हो सकती है। शनि का पाया चाँदी
होने के कारण धन लाभ के अवसर प्रापत होंगे।
कन्या:- कन्या राशि में शनि पंचम और षष्टम भाव का
स्वामी है। जो की तृतीय भाव से चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा। शनि चतुर्थ होने से शनि
की ढैया भी कहते है। शनि का पाया लोहा होने से मानसिक तनाव बड़ सकता है और नकारत्मक
विचार मन में आ सकते है। स्वस्थ संबंधी समस्याए उत्पन हो सकती है। गोचर का बृहस्पति
राशि पर स्थित होने से धार्मिक प्रविर्ति बनी रहेगी।
तुला:- तुला राशि में शनि चतुर्थ और पंचम भाव का
स्वामी है। जो की द्वितीय भाव से तृतीय भाव में प्रवेश करेगा। शनि का पाया ताम्र होगा।
शनि तृतीय भाव में आने से शुभ फल देगा। तुला राशि शनि की साढेसाती से मुक्त हो जाएगी।
सभी सुख सुविधायों में बृद्धि होगी। आत्मविश्वास में बृद्धि होगी। मानसिक सन्तुष्टि
और अच्छा स्वस्थ रहेगा।
बृश्चिक:- बृश्चिक राशि में शनि तृतीय और चतुर्थ
भाव का स्वामी है। जो की प्रथम भाव से द्वितीय भाव में प्रवेश करेगा। शनि का पाया चाँदी
होने से और शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण होने से मानसिक अशांति बन सकती है। घर के
माहौल में और वैवाहिक जीवन में समस्याए उत्पन हो सकती है।
धनु:- धनु राशि में शनि द्वितीय और तृतीय भाव का
स्वामी है। जो की द्वादश भाव से प्रथम में प्रवेश करेगा और साढेसाती का दूसरा चरण होगा।
शनि का पाया स्वर्ण होने से पारिवारिक जीवन को प्रभावित करेगा। मानसिक और स्वस्थ सम्बन्धी
परेशानियां आ सकती है। संगर्षपूर्ण परस्थितियो के साथ आय के साधन बनते रहेगे।
मकर:- मकर राशि में शनि लगन और द्वितीय भाव का स्वामी
है। जो की एकादश भाव से द्वादश भाव में प्रवेश करेगा और राशि साढेसाती के प्रथम चरण
के प्रभाव में आयेगी। शनि का पाया लोहा होने के कारण बनते कार्यो में रूकावट और बिलम्भ
होगा। खर्चों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। आत्मविश्वास में कमी आएगी। स्वास्थ्य
संबंधी परेशानी हो सकती है।
कुम्भ:-
कुंभ राशि में शनि लग्न और द्वादेश भाव का स्वामी है। जो कि दशम भाव से एकादश
भाव में प्रवेश करेगा। केतु का कुम्भ राशि में गोचर और पाया स्वर्ण होने से परिश्रम
करने के बाद धन लाभ और कार्यों में सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य संबंधी भी परेशानी हो सकती
है।
मीन:- मीन राशि में शनि एकादश और द्वादश भाव का स्वामी
है। जो की नवम भाव से दशम भाव में प्रवेश करेगा। पाया ताम्र होने के कारण बिघ्नों के
बाद भी कामजाबी मिलेगी। नोकरी या व्यवसाय में उतार चढ़ाव हो सकता है। बृहस्पति
की द्रिष्टि होने से धार्मिक प्रविर्ति बनी रहेगी।
धनतेरस पूजन मुर्हुत
धनतेरस दीपावली से दो दिन पहले बड़े ही धूमधाम से
मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने
वाले इस महापर्व धनतेरस को सुख-समृद्धि, धन, यश और वैभव का त्योहार माना जाता है।
इसी
दिन भगवान विष्णु देवताओं को अमर करने के लिए वैद्य धन्वंतरि के रूप में अमृत कलश सहित
सागर मंथन से प्रकट हुए थे। जिस के कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी
मनाई जाती है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि जी की पूजा की
जाती है। धन्वंतरि चिकित्सा के देवता भी हैं इसलिए उनसे अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी
की जाती है। धनतेरस के दिन अच्छी-अच्छी वस्तुएं,
चांदी के बर्तन, नए बर्तन,पीतल के बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है। धनतेरस
पर सायंकाल को दीपक जलाकर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है। इस
दिन को यमदीप दान भी कहा जाता है।
धनतेरस तिथि : 28 अक्तूबर 2016, शुक्रवार
धनतेरस पूजन मुर्हुत : सायं 17:35 से 18:20 तक (स्थिर लगन के बिना)
प्रदोष काल : सायं 17:35 से रात्रि 20:11 तक
वृषभ काल : सायं 18:35 से रात्रि 20:30 तक
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : सायं 16:15 से, 27 अक्तूबर
2016
त्रयोदशी तिथि समाप्त : सायं 18:20 तक, 28 अक्तूबर
2016
Deepawali Lakshmi Puja Muhurat
Deepawali is one of the most famous festivals of
India. Deepawali means "Festival of Lights". The festival is
celebrated on the 13th lunar day of Krishna Paksha. This festival is celebrated continuously for five
days. It starts with the 1st day of Dhanteras (Bhagwan Dhanwantari), followed
by the 2nd day of Narak charturdashi (Shotti Deepavali), the 3rd day of Deepawali
(Lakshmi puja), the 4th day of Kartika Shuddha Padyami (Gowardhan puja) and
ends with the 5th day of Yama Diwitiya (Bhai Dooj)
People of all religion enjoy this festival. People
clean their homes and decorate with making rangoli, lighting lamps, candles and
buy new cloths, pots or jewelry for their family. They exchange sweets, gifts
between friends and relatives. In the evening
they go to Temples, Gurudwaras for puja- archana and after puja they burn fire-crackers.
In Vedic astrology there are twelve Lagna signs in
twenty-four hours and they are categorized as Movable, Fixed and Dual signs. Fixed
lagna are considered shubh muhurat and are auspicious for Lakshmi Puja & Ganesh
Puja. If Puja is done during this fixed
lagna then Lakshmi ji will stay in the home and give her blessings.
The general
public should perform Puja in
Evening Time - 18:28 to 20:23 in
Taurus lagna. The Lord of Taurus sign is Venus. The deity of Venus is Lakshmi
ji and their vahan is owl. Lakshmi ji will stay in the home of
the worshipper and give her blessings, wealth, fortune, prosperity, money, luxury because Taurus
sign is exalted sign and mool trikon sign of Moon.
Given
below is the time of all fixed Lagna, Pradosh kaal for Deepawali Puja
Muhurat-
30 Oct 2016
Lagna Time
Scorpio (8) Morning- 07:55 to 10:13
Aquarius (11) Afternoon- 14:00 to 15:28
Taurus (2)
Evening- 18:28 to 20:23
Leo (5)
Mid Night- 24:58+
to 27:16+
Lakshmi Puja Muhurta = 18:28 to 20:09
Duration = 1 Hour 42 Mins
Pradosh Kaal = 17:33 to 20:09
Mahanishita Kaal = 23:38 to 24:31+
Amavasya Tithi Begins = 20:40 on 29 October 2016Amavasya Tithi Ends = 23:08 on 30 October 2016
There
are four Auspicious Chaoghadiya Puja Muhurat-Amrit, Shubh, Labh and Char
Morning
Muhurta (Char, Labh, Amrit) = 07:58 - 12:05
Afternoon Muhurta (Shubh) = 13:27 - 14:49
Evening Muhurta (Shubh, Amrit, Char) = 17:33 - 22:27
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