त्रिपाताकी चक्र

                                               
                                          



त्रिपातकी चक्र में विभिन्न ग्रहों की एक विशेष स्थिति वर्ष कुंडली के लगन के अनुसार होती है जो की जन्म कुंडली में स्थित ग्रहो को आरोही के अनुसार स्थित किया जाता है। जन्म समय की कुंडली में गृह जिस राशि में स्थित होते है वहा से शुरू होकर ग्रह हर साल एक राशि आगे बढ़ते हैं।
केंद्रीय ध्वज वार्षिक कुंडली के लग्न का प्रतिनिधित्व करता है। वर्ष कुंडली के समय में जो राशि उदित होती है।
त्रिपातकी चक्र में ग्रहो को स्थित करके लग्न और चन्द्रमा पर ग्रहो के वेध को देखा जा सकता है। विभिन्न ग्रहो का प्रभाव चन्द्रमा और लग्न पर वर्ष में कैसा रहेगा इस पर विचार किया जाता है।

मिथुन राशि में राहु के गोचर का राशिओ पर प्रभाव



राहु के गोचर का 12 राशिओ पर प्रभाव:-

मेष:- मेष राशि में राहु तीसरे भाव में स्वर्ण मूर्ति में गोचर करेगा। तीसरा भाव पराक्रम, साहस, छोटे भाई बहन का होता है। इस राशि वाले व्यक्तिओ के लिए राहु का यह गोचर काफी लाभदायक रहेगा। गोचर राहु के प्रभाव से आपको अचानक धन लाभ, भाग्य में वृद्धि, यात्राओं से लाभ, प्रकाशन के व्यवसाय में अच्छे परिणाम मिल सकते है।
बृष:- बृष राशि में राहु दूसरे भाव में ताम्र मूर्ति के साथ गोचर करेगा। कुंडली में दूसरा भाव वाणी, कुटुम्भ और धन का होता है। आपकी वाणी के कारण परिवार में विवाद , धन की हानि, नेत्र रोग हो सकता है। इस भाव में राहु का गोचर अशुभ होता
मिथुन:- मिथुन राशि में राहु लग्न में ही रजत मूर्ति के साथ गोचर करेगा। लग्न भाव शरीर, स्वास्थ्य, सवभाव और मान-सम्मान का होता है। प्रथम भाव में राहु मन को विचलित करेगा जिस के कारण स्वस्थ ख़राब हो सकता है। इस दौरान परेशानिया बढ़ेगी और मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। 
कर्क:- कर्क राशि में राहु द्वादश भाव में लोह मूर्ति के साथ गोचर करेगा। द्वादश भाव व्यव, हस्पताल, विदेश यात्रा और जेल का होता है। इस भाव में राहु से आर्थिक हानि, खर्चो में वृद्धि, पारिवारिक झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सिंह:- सिंह राशि में राहु एकादश भाव में ताम्र मूर्ति के साथ गोचर करेगा। एकादश भाव लाभ, बड़े भाई बहनो और इच्छाओ का होता है। इस भाव में राहु का गोचर शुभ माना जाता है। इस लिए व्यापर में लाभ, मान-सन्मान, अच्छा स्वास्थ्य, धन लाभ और पारिवारिक खुशिया मिल सकती है।
कन्या:- कन्या राशि में राहु दशम भाव में स्वर्ण मूर्ति के साथ गोचर करेगा। दशम भाव कर्म, करियर और व्यवसाय का होता है। इस भाव में गोचर राहु के  मिश्रित फल प्रपात होंगे।
तुला:- तुला राशि में राहु नवम भाव में रजत मूर्ति के साथ गोचर करेगा। नवम भाव भाग्य, धर्म, पिता और लम्भी यात्रा का होता है। त्रिकोण भाव में होने से लाभ हो सकता है। पारिवारिक परेशानिया बाद सकती है। पिता का स्वस्थ ख़राब हो सकता है।
बृश्चिक:- बृश्चिक राशि में राहु अष्टम भाव में लोह मूर्ति के साथ गोचर करेगा। अष्टम भाव अपमान, दुर्घटनाये और आयु का होता है। अष्टम भाव में राहु का गोचर अशुभ माना जाता है। आर्थिक हानि हो सकती है। परेशानिया बढ़ेगी और मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। 
धनु:- धनु  राशि में राहु सप्तम भाव में ताम्र मूर्ति के साथ गोचर करेगा। सप्तम भाव व्यक्ति के जीवन साथी, वैवाहिक जीवन, पार्टनरशिप का होता है।  वैवाहिक सम्बन्दो में वाद-विवाद हो सकता है। मानसिक परेशानिया बाद सकती है। पार्टनरशिप में मतभेद पैदा हो सकते है।
मकर:- मकर राशि में राहु छठे भाव में रजत मूर्ति के साथ गोचर करेगा। छठा भाव शत्रु, ऋण और रोग का होता है। इस भाव में राहु के गोचर के  अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपके भाग्य और करियर में उन्नति होगी। नौकरी में भी पदोन्नति  हो सकती है। छात्रों को परीक्षा में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। 
कुम्भ:- कुम्भ राशि में राहु पंचम भाव में स्वर्ण मूर्ति के साथ गोचर करेगा। पंचम भाव संतान सुख, प्रेम और बुद्धि का होता है। पंचम भाव में राहु संतान को समस्या उत्पन कर सकता है। बुद्धि को भ्रमित कर सकता है जिस के कारन आर्थिक है हो सकती है।
मीन:- मीन राशि में राहु का गोचर चतुर्थ भाव में लोह मूर्ति के साथ गोचर करेगा। चतुर्थ भाव  भूमि, वाहन, सुख-सुविधाएं और माता का होता है। आपकी माता का स्वस्थ बिगड़ सकता है। मानसिक और पारिवारिक चिंताए बढ़ेगी। आर्थिक क्षेत्र में आमदनी की अपेक्षा ख़र्च में वृद्धि हो सकती है।

धनतेरस - दीपावली पूजा मुहूर्त


दीपावली धन, धान्य, सुख, समृद्धि और शांति पांच दिनों का त्यौहार धनतेरस से लेकर भाई दूज तक होता है। जिस की शुरुआत कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस (भगवान धन्वंतरी )के दिन से होती है। जिस के अगले दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दर्शी को नरक चतुर्दर्शी, अगले दिन कार्तिक अमावस्या को दीपावली (लक्ष्मी पूजा, गणेश पूजा, सरस्वती पूजा ), कार्तिक शुकल प्रतिपदा को कार्तिका शुद्धपद्यमी (गोवर्धन पूजा ) और पाचवा अंतिम दिन यमदिवितिया (भाई दुज ) होते है।  
धनतेरस पूजा मुहूर्त  = 18:05 से 20:01
समय अवधि   = 1 घंटा 55 मिंट
प्रदोष  काल  = 17:29 से 20:07
वृष  काल  = 18:05 से 20:00
 वैदिक ज्योतिष में 24 घंटो में 12 लगन होते है।  जिन की प्रकृति चर, स्थिर और द्विस्वभाव होती है।  स्थिर लगन में लक्ष्मी ,गणेश, सरस्वती जी की पूजा को शुभ माना जाता है। स्थिर लगन में पूजा करने से लक्ष्मी जी घर में टिकती  और आशीर्वाद  देती है।  

वृष्चिक लगन ( 8 ) सवामी मंगल : - मंदिरो , हॉस्पिटल्स , होटल्स , विद्यालय ,कलाकार, राजनीती, इन्शुरन्स में काम करने वाले लोग इस लगन में पूजा कर सकते है।  मंगल ग्रह हर क्षेत्र  में शारीरिक शक्ति ऊर्जा और क्षमता स्रोत है।   
कुम्भ लगन ( 11 ) सवामी शनि :-शनि के बुरे प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए ,व्यापार में हानि वाले, रोगी, और  कर्ज में डूबे लोग इस लगन में पूजा कर सकते है। शनि की मूलत्रिकोण राशि कुम्भ है इस लिए इस लग्न में पूजा करने से शनि के अशुभ प्रभाव को काम किया जा सकता है।    
वृष लगन ( 2 ) सवामी शुक्र :- परिवार में रहने वाले लोग, विवाहित, बालक , मध्य वर्ग, निम्न वर्ग, ग्रामीण लोग , किसान, सभी प्रकार के व्यवसायियों  और वेतनभोगी लोगों के लिये इस लगन में लक्ष्मी ,गणेश, सरस्वती जी की पूजा करनी शुभ फलदायक होती है।  चन्द्रमा की उच्च और मूलत्रिकोण राशि वृष है
सिंह लगन ( 5 ) स्वामी सूर्य -तपस्वी, जोगी, संतों और तांत्रिक समुदाय के लोग इस लगन में पूजा करते है।  सिंह राशि सूर्य की मूलत्रिकोण राशि है। सूर्य अधिकार और मजबूत नेतृत्व का स्रोत है।
सभी लोगो को संध्या समय बृष लग्न में 17:57 से 19:52 के समय में पूजा करनी शुभ रहेगी।  क्योंकि बृष राशि चंद्रमा की उच्च और मूलत्रिकोण राशि है।  जिस का स्वामी शुक्र है और शुक्र का देवता लक्ष्मी जी है। जिन की पूजा करने से  हमें  धन, भाग्य, सुख समृद्धि मिलेगी।

लक्ष्मी जी,गणेश जी की पूजा के लिये 07 नवंबर 2018 को स्थिर लगन का समय, प्रदोष काल का समय और चौघड़िया का शुभ मुहूर्त
                       लगन                                  समय
                          वृष्चिक (8)                        प्रातकाल  - 07:24 से 09:42
                          कुम्भ (11)                         दोपहर   -13:29 से 14:57
                          वृष (2)                            संध्या काल - 17:57 से 19:52
                          सिंह (5)                           रात्रि काल  - 24:27+ से 26:45+

                        प्रदोष काल :-                               17:27 से 20:06
                       महानिषिता काल:-                  23:38 से 24:31 +
अमावस्या तिथि की शुरुआत:-   06 नवंबर 2018  को  22:27  से ले कर 07 नवंबर 2018 को 21:31 तक है।

पूजा के लिये शुभ चौघड़िया मुहूर्त :-  लाभ, अमृत, शुभ, चर 
 लाभ :- 06:41 से 08:02                                      लाभ :- 16:07 से 17:28                                                                                        
अमृत:- 08:02 से 09:23                                      शुभ :- 19:07 से 20:46                                                                                  
 शुभ :-  10:44 से 12:05                                      अमृत :- 20:46 से 22:26                                                                                 
चर :-  14:46 से 16:07                                      चर :- 22:26 से 24:05+